आजम खान जौहर विश्वविद्यालय और सियासत

*(शिब्ली रामपुरी)*
सियासत में जिस बुलंदी पर आजम खान पहुंचेऐसी बुलंदी बहुत कम लोगों को नसीब होती है और यह भी कहना गलत नहीं होगा कि जिस तरह से इतनी बुलंदी पर पहुंचने के बाद आजम खान जमीन पर आए और उनके सामने एक के बाद एक परेशानियां खड़ी होती गई ऐसा भी मुल्क की सियासत में शायद ही किसी लीडर के साथ हुआ होगा.
आजम खान की राजनीतिक मामलों में कुछ बातों से असहमति जरूर हो सकती है लेकिन यह भी कहना गलत नहीं होगा कि आजम खान जितने काबिल लीडर हैं और जैसी वफादारी उन्होंने समाजवादी पार्टी के साथ दिखाई है ऐसी शायद ही कहीं देखने को मौजूदा दौर में मिलती हो.. समाजवादी पार्टी जब शुरू हुई आजम खान तभी से समाजवादी पार्टी के साथ जुड़े हैं और समाजवादी पार्टी को बनाने से लेकर उसको सत्ता तक पहुंचाने में आजम खान का बड़ा किरदार रहा है और इसको मुलायम सिंह यादव मानते भी थे कि आजम खान ने समाजवादी पार्टी के लिए काफी मेहनत की और यही वजह रही कि जब-जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी सत्ता में आई तब तब आजम खान का काफी राजनीतिक रुतबा रहा. जहां तक अखिलेश यादव की बात है तो अखिलेश यादव पर आजम खान के एक नहीं बल्कि काफी समर्थकों ने यह इल्जाम लगाया कि अखिलेश यादव को जिस तरह से आजम खान के मामले में हमदर्दी दिखानी चाहिए थी वैसा अखिलेश यादव में कम ही देखने को मिला हालांकि अखिलेश यादव की तरफ से बार-बार कहा जाता रहा है कि हमारे दिल में आजम खान बसे हुए हैं और हम उनका बुरे वक्त में साथ नहीं छोड़ेंगे हमसे जो कुछ हो रहा है हम कर रहे हैं और बाकी तो काम अदालत का है जहां से हमें आजम खान के मामले में इंसाफ की पूरी उम्मीद है ऐसा अखिलेश यादव लगातार कहते रहे हैं और मौजूदा दौर मे भी बोल रहे हैं. आजम खान जब कुछ वक्त पहले जेल से बाहर आए थे तब लोगों को यह लगा था कि वह समाजवादी पार्टी छोड़ देंगे और उनको अपने साथ लेने के लिए कांग्रेस से लेकर चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की एमआईएम भी बेकरार दिखाई दी लेकिन आजम खान ने शायराना अंदाज में अखिलेश यादव पर कटाक्ष तो जरूर किया मगर उन्होंने समाजवादी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा और वह अखिलेश के साथ पूरी तरह से वफादार नजर आए और अभी भी उनकी वफादारी कायम है.
यहां यह कहना भी जरूरी है कि ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो यह कहते हैं कि अखिलेश यादव के प्रति जो आजम खान की वफादारी रही है वह आजम खान पर काफी भारी पड़ी है. जौहर यूनिवर्सिटी के मामले को लेकर आजम खान एक बार फिर चर्चा में हैं और इस पर कांग्रेस के कई नेताओं ने भी आजम खान के प्रति हमदर्दी का इजहार किया है और कहा है कि ऐसा नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि यूनिवर्सिटी सिर्फ आजम खान की नहीं बल्कि उसमें पढ़ने वाले हर एक स्टूडेंट की है और अगर उस पर बुलडोजर की कार्रवाई होती है तो फिर इससे स्टूडेंट का भविष्य खराब होगा. आजम खान की राजनीति पर यदि गंभीरता से ध्यान दिया जाए तो उनके दो ख्वाब नजर आते हैं एक राजनीति में दिग्गज नेता बनकर बड़ा रुतबा हासिल करना और दूसरा जो उनका ख्वाब है वह शिक्षा को लेकर रहा है जिसके चलते उन्होंने जौहर यूनिवर्सिटी कायम की. आजम खान का हमेशा से यह सपना रहा कि वह एजुकेशन के मामले में ऐतिहासिक कम कर सकें और इसी दृष्टिकोण के चलते उन्होंने यूनिवर्सिटी बनाई हालांकि शुरुआत से ही यूनिवर्सिटी बनाए जाने को लेकर आजम खान किसी न किसी तरह से कानूनी मामलों में घिरे रहे. अब रामपुर विकास प्राधिकरण ने जौहर यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारत को अवैध घोषित कर ध्वस्त करने का आदेश जारी किया है आरोप है कि केवल दो इमारत का नक्शा पास था. विश्वविद्यालय प्रशासन को इसे खुद हटाने के लिए कुछ दिन का समय भी दिया गया है जिसके बाद से राजनीतिक सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं और आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है. एमआईएम के कई नेताओं और सहारनपुर से कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद ने इस कार्रवाई को गलत कहा है.



