सुप्रीम कोर्ट की डॉक्टरों पर हमले को लेकर सख्त टिप्पणी, शिवसेना पार्षद की जमानत रद्द
डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर हमले के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
महाराष्ट्र के ठाणे जिले के एक नगर निगम अस्पताल में डॉक्टरों से मारपीट के आरोप से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को मिली जमानत रद्द कर दी है। अदालत ने उन्हें तीन दिन के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जनता के वोट से चुना गया पद किसी व्यक्ति को कानून से ऊपर होने का अधिकार नहीं देता।
अदालत के मुताबिक, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी आम नागरिकों से अधिक होती है और उनसे कानून का सम्मान करने तथा सार्वजनिक संस्थाओं में लोगों का भरोसा बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है।
कोर्ट ने अस्पतालों में ऐसा माहौल बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया, जहां डॉक्टर बिना किसी डर या दबाव के मरीजों का इलाज कर सकें।
मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अगस्त में रमेश म्हात्रे को जमानत दी थी, लेकिन महाराष्ट्र सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों पर हमले को लेकर कई मामले सामने आ रहे हैं।
यानी अदालत का संदेश साफ है—पद चाहे कोई भी हो, कानून सभी के लिए बराबर है।