दरगाह साबिर पाक में इप्टा की टीम ने मांगी अमन-ओ-अमान की दुआ
नुक्कड़ नाटक और गीतों के जरिए बालिका शिक्षा, नशाबंदी और नफरत के खिलाफ दिया संदेश
पिरान कलियर/रुड़की (अकील अहमद) विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत साबिर पाक में भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा), उत्तर प्रदेश की टीम ने हाजिरी देकर देश में अमन, शांति और आपसी सौहार्द के लिए दुआ मांगी। लखनऊ से पहुंची इप्टा की टीम ने कविताओं, गीतों और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से शिक्षा, प्रेम, मानवता और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया।
उत्तर प्रदेश इप्टा की प्रांतीय उपाध्यक्ष श्रीमती सुमन श्रीवास्तव और शायर ओम प्रकाश ‘नदीम’ के नेतृत्व में पहुंची बालिकाओं ने दरगाह में पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद प्रौढ़ शिक्षा, बालिका शिक्षा, नशाबंदी और समाज में बढ़ती नफरत के खिलाफ अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया।
इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय शायर एवं उत्तराखंड भाषा संस्थान के उर्दू संकाय के प्रभारी सदस्य अफजल मंगलोरी ने कहा कि हजरत साबिर पाक ने लगभग 700 वर्ष पूर्व प्रेम, सद्भावना और मानवता का जो संदेश दिया था, उसी संदेश की ज्योति इप्टा अपने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से पूरे देश में प्रज्वलित कर रही है। उन्होंने कहा कि कला, साहित्य, संगीत और रंगमंच समाज को जोड़ने तथा आपसी भाईचारे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लखनऊ से आई बालिकाओं की टीम ने कलियर के पीपल-झंडा चौक पर लघु नुक्कड़ नाटक और गीत प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से शिक्षा के महत्व, प्रेम और नफरत से दूर रहने का संदेश दिया गया। बालिकाओं ने अपनी प्रस्तुति में कहा—
“ढाई आखर प्रेम के, पढ़ने और पढ़ाने आए हैं,
हम भारत से नफरत का हर दाग मिटाने आए हैं।”
वहीं, अपने गीत की पंक्तियों—
“शाम से रात के आखिरी छोर तक,
ये मशालें जलेंगी यूं ही भोर तक।”
के जरिए टीम ने प्रेम, ज्ञान और सामाजिक जागरूकता की मशाल जलाए रखने का आह्वान किया।
इप्टा की इस टीम में कु. शिवी सिंह, कु. कविता यादव, कु. गरिमा सिंह, कु. आंचल सिंह, कु. सोनी यादव और कु. सविता यादव शामिल रहीं।
दरगाह पहुंचने पर दरगाह प्रभारी सद्दाम अली, ओम प्रकाश ‘नूर’, सैयद इंतेखाब, राव शारिक, मोहम्मद हारून, राव सिकंदर, शशि कुमार सैनी, जमशेद जिम्मू और असलम कुरैशी सहित अन्य लोगों ने इप्टा की टीम का स्वागत किया और प्रसाद भेंट किया।
इप्टा की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने शिक्षा, प्रेम, मानवता और सामाजिक सद्भाव का संदेश देते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव की आवश्यकता को रेखांकित किया।