MBBS दाखिला फर्जीवाड़े में तीसरी FIR, एक और आरोपी की पहचान
फर्जी दस्तावेजों से निवास और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र के लिए किया था आवेदन, जांच का दायरा बढ़ा
देहरादून। उत्तराखंड में NEET-UG 2025 के आधार पर MBBS दाखिलों में कथित फर्जीवाड़े की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे का लाभ लेने के लिए कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किए जाने के मामले में पुलिस जांच के दौरान एक और आरोपी की पहचान हुई है। इस मामले में अब तीसरी FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जांच के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निवास और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए थे। सत्यापन के दौरान कई दस्तावेजों में गड़बड़ियां सामने आने के बाद पुलिस ने मुकदमे दर्ज किए।
फर्जी दस्तावेजों से बनाया गया आधार
पुलिस की जांच में सामने आया है कि कुछ अभ्यर्थियों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनकी सत्यता संदिग्ध पाई गई। कुछ मामलों में दिए गए पते पर अभ्यर्थियों के निवास करने की पुष्टि भी नहीं हुई।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन दस्तावेजों को तैयार कराने में किन लोगों की भूमिका थी और आवेदन से लेकर प्रमाण पत्र जारी होने तक प्रक्रिया के किस-किस स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई।
एक ही रिकॉर्ड के इस्तेमाल की भी जांच
इस पूरे प्रकरण में जांच एजेंसियों को ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं, जिनमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी से संबंधित विवरण और पेंशन भुगतान आदेश (PPO) नंबर को लेकर सवाल उठे हैं। एक ही PPO नंबर का अलग-अलग अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में इस्तेमाल किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
अब पुलिस उत्तराखंड के साथ-साथ दूसरे राज्यों के रिकॉर्ड से भी इन विवरणों का मिलान कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं किसी वास्तविक स्वतंत्रता सेनानी के रिकॉर्ड का गलत तरीके से इस्तेमाल तो नहीं किया गया।
SIT कर रही पूरे मामले की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। SIT ने मेडिकल कॉलेजों और संबंधित सरकारी कार्यालयों से दस्तावेज जुटाकर उनकी जांच शुरू की है। आवेदन से लेकर प्रमाण पत्र जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया और डिजिटल रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में हैं।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और MBBS दाखिला दिलाने में किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं।
जांच में और नाम सामने आने की संभावना
अब तक की जांच में कई अभ्यर्थियों और उनसे जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की जा चुकी है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ, दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच और ऑनलाइन आवेदन के डिजिटल ट्रेल के जरिए पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
जांच आगे बढ़ने के साथ इस कथित फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है। हालांकि, मामले में अंतिम निष्कर्ष पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।