पत्रकारों के उत्पीड़न पर जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ उत्तराखण्ड चिंतित
राष्ट्रपति, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और पीआईबी को पत्र भेजने का निर्णय*
देहरादून। जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ उत्तराखण्ड की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में पत्रकारों की विभिन्न समस्याओं और देश के अलग-अलग हिस्सों में पत्रकारों के साथ कथित मारपीट, उत्पीड़न, धमकी तथा सवाल पूछने पर हिरासत में लिए जाने की घटनाओं पर गहन मंथन किया गया। बैठक में पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्र पत्रकारिता को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए इन घटनाओं के संबंध में राष्ट्रपति, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) और प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) को पत्र भेजने का निर्णय लिया गया।
सोमवार को देहरादून के एक रेस्टोरेंट में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष उमा शंकर प्रवीण मेहता ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र में जनता की आवाज को शासन और समाज के सामने रखने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। इसलिए पत्रकारों को स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक होकर काम करने के लिए सुरक्षित वातावरण मिलना बेहद जरूरी है।
उन्होंने दिल्ली और उत्तर प्रदेश में महिला पत्रकारों के साथ हुई कथित मारपीट और उत्पीड़न की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि पत्रकारों को उनके पेशेवर दायित्वों के निर्वहन के दौरान निशाना बनाया जाना सीधे तौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
प्रदेश महासचिव गिरीश पंत ने बैठक में पत्रकारों के साथ हाल में हुई विभिन्न घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दिल्ली में नफीसा खान और शाहीन खान को पुलिस हिरासत में कथित तौर पर मारपीट का सामना करना पड़ा। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में ग्राउंड रिपोर्टिंग करने वाली पत्रकार पूजा माथुर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने का मामला भी बैठक में उठाया गया।
गिरीश पंत ने कहा कि पत्रकार का दायित्व घटनास्थल पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति को सामने लाना और जनता तक तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाना है। यदि ग्राउंड रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के खिलाफ ही मुकदमे दर्ज किए जाएंगे अथवा सवाल पूछने पर उन्हें परेशान किया जाएगा तो इसका सीधा असर स्वतंत्र पत्रकारिता पर पड़ेगा।
उन्होंने लखनऊ में महिला पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव के साथ सवाल पूछने को लेकर कथित उत्पीड़न की घटना का भी उल्लेख किया और कहा कि पत्रकारों के साथ होने वाली ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
बैठक में यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से पत्रकारों पर हमले, धमकी और उत्पीड़न की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। यदि ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो इससे स्वतंत्र पत्रकारिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि पत्रकारों के उत्पीड़न से जुड़ी घटनाओं के संबंध में राष्ट्रपति, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और पीआईबी को पत्र भेजा जाएगा। पत्र के माध्यम से पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उन्हें स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने का वातावरण उपलब्ध कराने तथा पत्रकारों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की जाएगी।
बैठक में यूनियन की संगठनात्मक गतिविधियों पर भी चर्चा की गई। देहरादून जिला कार्यकारिणी के चुनाव के लिए 24 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई। पदाधिकारियों ने चुनाव प्रक्रिया को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संपन्न कराने पर सहमति जताई।
इसके अलावा अक्टूबर माह में यूनियन की स्मारिका प्रकाशित करने तथा नवंबर में राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन आयोजित करने पर भी चर्चा हुई। बैठक में हैदराबाद में प्रस्तावित महिला पत्रकारों के राष्ट्रीय सम्मेलन में उत्तराखण्ड का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रदेश से एक प्रतिनिधिमंडल भेजने पर भी सहमति बनी।
बैठक में नैनीताल जिले में तैनात सूचना अधिकारी एवं सहायक निदेशक गिरजा शंकर जोशी के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया गया। उपस्थित पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा और शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
बैठक में प्रदेश कोषाध्यक्ष ललिता बलूनी, संजीव पंत, एसपी उनियाल, द्विजेन्द्र बहुगुणा, विरेन्द्र दत्त गैरोला, अनिल वर्मा, अधीर मुखर्जी, देवेंद्र प्रसाद चमोली, गिरीश तिवारी, जाहिद अली, वेणीराम उनियाल, अभिनव नायक, सुमित डबराल, सीआर भट्ट, धर्मेंद्र भट्ट, ज्योति भट्ट, अशोक शर्मा, मोहम्मद खालिद, मोहम्मद शाहनजर, अफरोज खान, विरेश रोहिला, किशन सिंह गुसाई, आशुतोष उनियाल समेत यूनियन के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।