भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान में रचा इतिहास! NASA-ISRO का NISAR सैटेलाइट बदलेगा दुनिया की निगरानी का तरीका
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसियों ISRO और NASA के संयुक्त मिशन NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) ने अंतरिक्ष विज्ञान में एक नया इतिहास रच दिया है। यह दुनिया का पहला ऐसा पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) सैटेलाइट है, जिसमें एक साथ L-Band और S-Band रडार तकनीक का उपयोग किया गया है। इसका उद्देश्य पृथ्वी पर होने वाले सूक्ष्म से सूक्ष्म बदलावों को रिकॉर्ड करना और प्राकृतिक आपदाओं के बारे में बेहतर जानकारी उपलब्ध कराना है।
NISAR आखिर है क्या?
NISAR एक अत्याधुनिक रडार सैटेलाइट है जो बादलों, बारिश और रात के अंधेरे में भी पृथ्वी की स्पष्ट तस्वीरें लेने में सक्षम है। सामान्य कैमरा आधारित सैटेलाइट जहां मौसम पर निर्भर होते हैं, वहीं NISAR हर परिस्थिति में लगातार डेटा भेज सकता है।
किन-किन क्षेत्रों में होगा फायदा?
यह मिशन कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में क्रांतिकारी साबित हो सकता है—
– भूकंप के बाद जमीन में आए बदलावों का पता लगाना।
– बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं की बेहतर निगरानी।
– ग्लेशियरों के पिघलने की गति का अध्ययन।
– किसानों के लिए मिट्टी और फसलों की स्थिति का विश्लेषण।
– जंगलों की कटाई और पर्यावरणीय बदलावों की निगरानी।
– समुद्री तटीय क्षेत्रों और जलवायु परिवर्तन पर सटीक जानकारी।
NISAR क्यों है खास?
विशेषज्ञों के अनुसार यह सैटेलाइट पृथ्वी की सतह में सेंटीमीटर स्तर तक होने वाले बदलावों को भी माप सकता है। यही कारण है कि इसे दुनिया के सबसे उन्नत पृथ्वी निगरानी मिशनों में गिना जा रहा है। यह पूरी दुनिया के भूमि और बर्फ से ढके क्षेत्रों का नियमित अंतराल पर सर्वे करेगा और वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण डेटा उपलब्ध कराएगा।
पहली तस्वीरों ने बढ़ाया उत्साह
हाल ही में NISAR द्वारा जारी शुरुआती रडार इमेजों में अंटार्कटिका के ग्लेशियरों और बर्फीले क्षेत्रों की बेहद स्पष्ट तस्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों से वैज्ञानिकों को बर्फ की गतिविधियों, ग्लेशियरों की दरारों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने में बड़ी मदद मिल रही है।
भारत के लिए क्यों है बड़ी उपलब्धि?
यह मिशन भारत की अंतरिक्ष तकनीक और वैज्ञानिक क्षमता का वैश्विक स्तर पर बड़ा प्रमाण माना जा रहा है। NASA और ISRO के सहयोग से तैयार यह मिशन आने वाले वर्षों में वैज्ञानिक शोध, कृषि, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि NISAR से प्राप्त डेटा का लाभ केवल भारत या अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को मिलेगा। यही वजह है कि इस मिशन को 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण पृथ्वी निगरानी कार्यक्रमों में शामिल किया जा रहा है।
Awaaz e Hind



