शहर क़ाज़ी मुफ़्ती हशीम अहमद क़ासमी ने लाउडस्पीकर अनुमति प्रकरण उठाया, पूर्व बीजेपी पार्षद आफ़ताब आलम के साथ डीएम को सौंपा ज्ञापन
पदभार संभालने के बाद शहर क़ाज़ी की पहली सार्वजनिक पहल
देहरादून। शहर क़ाज़ी देहरादून मुफ़्ती हशीम अहमद क़ासमी व पूर्व पार्षद आफ़ताब आलम के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान से शिष्टाचार भेंट कर मस्जिदों में अज़ान के लिए प्रयुक्त लाउडस्पीकरों से जुड़े मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व पार्षद आफ़ताब आलम भी प्रमुख रूप से शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए वर्ष 2022 से लंबित लाउडस्पीकर अनुमति आवेदनों पर शीघ्र निर्णय लेने तथा किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुरूप किए जाने की मांग की।
शहर क़ाज़ी मुफ़्ती हशीम अहमद क़ासमी ने कहा कि जनपद की अनेक मस्जिदों की प्रबंधन समितियों ने वर्ष 2022 में सर्वोच्च न्यायालय, उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय तथा शासन के निर्देशों का पालन करते हुए लाउडस्पीकर अनुमति के लिए विधिवत आवेदन प्रस्तुत किए थे। बावजूद इसके, तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी इन आवेदनों पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी आवेदन में कोई कमी है तो संबंधित मस्जिद प्रबंधन समिति अथवा शहर क़ाज़ी कार्यालय को सूचित किया जाए, ताकि निर्धारित समय में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा सकें। पूर्व पार्षद आफ़ताब आलम ने कहा कि प्रशासन की कार्यवाही पूरी तरह पारदर्शी, न्यायसंगत और कानून के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन संस्थाओं ने समय रहते अनुमति के लिए आवेदन कर दिए हैं, उनके आवेदनों पर निर्णय किए बिना केवल अनुमति के अभाव का आधार बनाकर कार्रवाई करना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने प्रशासन से सभी धार्मिक स्थलों पर ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का समान रूप से पालन सुनिश्चित कराने की भी मांग की। ज्ञापन में कहा गया है कि हाल के दिनों में कुछ मस्जिदों से पुलिस प्रशासन द्वारा यह कहते हुए लाउडस्पीकर हटवाए गए कि सक्षम प्राधिकारी की अनुमति उपलब्ध नहीं है, जबकि संबंधित मस्जिदों ने वर्षों पहले अनुमति के लिए आवेदन कर दिए थे और वे आज भी लंबित हैं। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि लंबित आवेदनों का शीघ्र निस्तारण किया जाए, आवश्यक होने पर संबंधित पक्षों को अभिलेख पूर्ण करने का अवसर दिया जाए तथा अंतिम निर्णय होने तक बिना विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाए किसी भी मस्जिद से ध्वनि विस्तारक यंत्र न हटाया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी मस्जिद प्रबंधन समितियां ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000, न्यायालयों के निर्देशों तथा जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित सभी मानकों का पूर्ण पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और कानून-व्यवस्था व सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करती रहेंगी। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल में पूर्व पार्षद आफ़ताब आलम, समाजसेवी खुर्शीद अहमद, तंजीम रहनुमा-ए-मिल्लत के अध्यक्ष लताफ़त हुसैन, जामा मस्जिद पलटन बाज़ार के सचिव अमीर अहमद कुरैशी, हाजी दिलशाद कुरैशी, मास्टर मुस्तकीम हसन, समाजसेवी तौसीफ़ ख़ान, मुफ़्ती ताहिर क़ासमी, इसरार अहमद सहित समाज के अनेक जिम्मेदार लोग उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि शहर क़ाज़ी का पदभार संभालने के बाद मुफ़्ती हशीम अहमद क़ासमी द्वारा किसी सार्वजनिक विषय पर उठाया गया यह पहला प्रमुख कदम माना जा रहा है।