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बग़ैर नोटिस मसाजिद के लाउडस्पीकर हटाने पर शहर क़ाज़ी का एहतिजाज, डीएम और एसएसपी को भेजा ख़त

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बग़ैर नोटिस मसाजिद के लाउडस्पीकर हटाने पर शहर क़ाज़ी का एहतिजाज, डीएम और एसएसपी को भेजा ख़त

हर कार्रवाई क़ानूनी तरीक़े से हो, मुस्लिम समाज क़ानून का एहतराम करता है: मुफ़्ती हाशीम

देहरादून। शहर क़ाज़ी देहरादून मुफ़्ती हाशीम अहमद क़ासमी ने जनपद के मुख़्तलिफ़ इलाक़ों से मिल रही उन इत्तिलाआत पर फ़िक्र का इज़हार करते हुए ज़िलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून को एक तफ़्सीली ख़त रवाना किया है, जिनमें यह बताया गया है कि बग़ैर किसी तहरीरी इत्तिला या नोटिस के, मा. सुप्रीम कोर्ट के अहकाम का हवाला देते हुए मसाजिद में अज़ान के लिए इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर हटाने के मौखिक हिदायात दिए जा रहे हैं। कुछ मुक़ामात पर लाउडस्पीकर उतारे जाने की भी इत्तिला मिली है।

शहर क़ाज़ी ने अपने ख़त में कहा है कि अगर किसी भी किस्म की इंतिज़ामी कार्रवाई की जाती है, तो वह मुल्क के क़ानून, दस्तोरी उसूलों और मुक़र्रर क़ानूनी प्रक्रिया के मुताबिक़ ही अमल में लाई जानी चाहिए।

उन्होंने वाज़ेह किया कि जनपद देहरादून समेत पूरे उत्तराखण्ड की मसाजिद में अज़ान के लिए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल आम तौर पर चौबीस घंटों में महज़ 10 से 15 मिनट तक ही होता है। साथ ही आवाज़ की सतह (ध्वनि स्तर) उत्तराखण्ड हुकूमत के महकमा-ए-माहौलियात, जंगलात व मौसमी तब्दीली की 9 जून 2021 की अधिसूचना में मुक़र्रर मयार के मुताबिक़ रखी जाती है।

मुफ़्ती हाशीम अहमद क़ासमी ने यह भी कहा कि अगर किसी मस्जिद के बारे में आवाज़ की सतह तयशुदा हद से ज़्यादा होने की कोई शिकायत या इत्तिला मिलती है, तो मुताल्लिक़ा इमाम और इंतिज़ामिया कमेटी को फ़ौरन मयार के मुताबिक़ आवाज़ रखने की हिदायत दी जाती है और उस पर अमल भी यक़ीनी बनाया जाता है।

उन्होंने अपने ख़त में यह भी तजवीज़ दी कि अगर ध्वनि प्रदूषण से मुताल्लिक़ कोई शिकायत या मसला सामने आता है, तो सबसे पहले मुताल्लिक़ा मस्जिद की इंतिज़ामिया कमेटी या शहर क़ाज़ी दफ़्तर को बाक़ायदा आगाह किया जाए, ताकि फ़ौरन ज़रूरी कार्रवाई करते हुए तयशुदा क़वायद पर अमल यक़ीनी बनाया जा सके। साथ ही उन्होंने कहा कि ध्वनि प्रदूषण से जुड़े तमाम क़ानूनी अहकाम का निफ़ाज़ सभी मज़हबी इबादतगाहों पर यकसाँ तौर पर और क़ानून के मुताबिक़ होना चाहिए।

शहर क़ाज़ी ने अपने ख़त में साफ़ तौर पर कहा कि मुस्लिम समाज मा. सुप्रीम कोर्ट के अहकाम, हिन्दुस्तानी दस्तूर, ध्वनि प्रदूषण से मुताल्लिक़ तमाम क़ानूनी प्रावधानों और उत्तराखण्ड हुकूमत की तरफ़ से वक़्त-ब-वक़्त जारी हिदायात का मुकम्मल एहतराम करता है और उन पर अमल का पाबंद है। उन्होंने कहा कि इस ख़त का मक़सद इंतिज़ामिया के साथ बेहतर राब्ता और हमआहंगी क़ायम रखते हुए हर कार्रवाई को क़ानूनी और दस्तूरी तरीक़े से यक़ीनी बनाना और समाजी हमआहंगी व अमन-ओ-अमान को बरक़रार रखना है।

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